खरगोश और कछुआ की कहानी
. खरगोश और कछुए की कहानी
एक बार एक खरगोश और एक कछुआ था। वो दोनों एक बहुत बड़े जंगल में बहुत सारे जानवरों जैसे शेर, हाथी, हिरण और मगरमच्छ के साथ रहते थे। खरगोश में यह खास बात थी कि वह बहुत तेज दौड़ता था इसलिए वो जब भी किसी के साथ रेस में भाग लेता था और तेज दौड़ने की वजह से जीत जाता था। समय के चलते लगातार जीतने की वजह से उस खरगोश को अहंकार यानी घमंड हो गया था। घमंडी खरगोश लगातार रेस में भाग लेता था और थोड़ी सी मेहनत करके ही जीत जाता था। उसी जंगल में एक समझदार कछुआ भी रहता था। खरगोश के विपरीत ही वह कछुआ बहुत धीरे चलता था। वास्तव में वह कछुआ पूरे जंगल में सबसे ज्यादा धीरे चलने वाला जानवर था। कछुआ अक्सर उस घमंडी खरगोश को देखता था और उसको यह समझ में आने लगा था कि सफलता उस खरगोश के सिर चढ़ती जा रही है। इसलिए कछुए ने सोचा कि वह खरगोश को सबक सिखाएगा। उसने खरगोश के साथ जंगल के सभी जानवरों को बुलाया और खरगोश को रेस करने के लिए चैलेंज दिया। अब क्या, यह सुनते ही सभी जानवर ठहाके मारकर जोर-जोर से हँसने लगे। सबने सोचा कि कछुए से तेज दौड़नेवाले जानवर भी उस खरगोश से हार चुके थे तो जंगल में सबसे धीरे चलनेवाला कछुआ खरगोश को कैसे हरा पाएगा? सब बहुत अचंभित थे और खरगोश को तो यह चैलेंज पसंद आना ही था इसलिए उसने इस चैलेंज को स्वीकार कर लिया।
अब अगले दिन खरगोश और कछुआ रेस करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे। जंगल के बंदर ने हरी झंडी दिखाते हुए कहा, ‘ऑन योर मार्क, गेट सेट एंड गो। 
खुद को चालाक समझने वाला खरगोश तेजी से दौड़ पड़ा और दौड़ते-दौड़ते वह तुरंत आधे रास्ते में पहुँच गया पर कछुआ बेचारा अभी अपनी धीमी चाल के साथ रेस की शुरुआत में था। कुछ समय के बाद खरगोश रुका और सोचने लगा कि कछुआ अंतिम लाइन तक पहुँचने में बहुत समय लगाएगा इसलिए जाहिर सी बात है उसे तो हारना ही है। इसलिए खरगोश सोचा कि वह थोड़ा सा सो लेता है। खरगोश एक पेड़ की ठंडी छांव के नीचे लेटा और सो गया। इसी के साथ कछुए ने हार नहीं मानी और वह लगातार भागता रहा। अंत में सभी आश्चर्य चकित हो गए क्योंकि कछुआ रेस जीत चुका था।

अपने घमंड के कारण खरगोश रेस हार गया था। इस कहानी से हमें दो सीख मिलती है; पहली कि कभी भी किसी व्यक्ति को अपनी जीत पर घमंड नहीं करना चाहिए और दूसरी धीरे व संयम से कार्य करनेवाले ही जीत हासिल करते हैं।

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